दमोह। शनि जन्मोत्सव के अवसर पर आज गुरुवार को एसपीएम नगर स्थित श्री शिव शनि हनुमान मंदिर में कोरोना काल के चलते विशेष नियमों का पालन करते हुए शनि जन्मोत्सव महोत्सव सामान्य रूप से मनाया जाएगा। जिले के एकमात्र शनि मंदिर में शनि जन्मोत्सव महोत्सव के अवसर पर पूजन अर्चन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शनि देव का पूजन अभिषेक के अलावा शाम 5 बजे से विधायक अजय टंडन की उपस्थिति में हवन पूजन आयोजित होगा। इसके उपरांत प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा। अमावस्या के दिन 10 जून गुरुवार को शनि जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा जिसमें समिति ने सभी धर्म प्रेमियों से उपस्थिति की अपील की है।
पं बाल कृष्ण शास्त्री एवं आचार्य आशुतोष गौतम ने बताया कि धर्म और ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य पुत्र शनिदेव को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिन्दू पंचांग के अनुसार शनि जन्मोत्सव हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस वर्ष शनि जन्मोत्सव 10 जून, गुरुवार को मनाई जायेगी। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की विधि पूर्वक उपासना करने से शनिजनित दोषों को कम किया जा सकता है। हिंदू धर्म के अनुसार, शनिदेव को न्यायप्रिय व कर्मों के अनुसार फल देने वाला देवता कहा गया है। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि देव की सदैव कृपा बनी रहती है और उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। जबकि बुरे कर्म करने वाले व्यक्ति को शनिदेव कठोर दंड देते है। शनि देव की कुदृष्टि से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शनि जन्मोत्सव के दिन कुछ उपायों को करने से शनिदेव प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं तो वहीं कुछ कार्य ऐसे हैं जिनको करने से वे रुष्ट हो सकते हैं, ऐसे कार्यों को इस दिन भूलकर भी न करें।
आचार्य आशुतोष गौतम (छोटू शास्त्री) ने बताया कि शनि जन्मोत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म से शुद्ध हों। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर हाथ में जल लेकर शनि देव की पूजा और व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर एक सुपारी रखकर उसके दोनों तरफ तेल का दीपक और धूप जलाएं। शनि देव के इस प्रतीक स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, और इत्र आदि से स्नान कराएं। इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले फूल अर्पित करें। इसके उपरांत तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें। इसके बाद श्री फल सहित अन्य फल भी अर्पित करें। पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप भी करना चाहिए। माला जपने के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें और शनि महाराज की आरती भी करें।
आचार्य आशुतोष गौतम (छोटू शास्त्री) ने बताया कि इन बातों का रखें ध्यान 1. शनि देव की पूजा के दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए। 2. शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा जरूर करना चाहिए। 3. शनि जयंती या शनि पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 4. इस दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए। 5. किसी जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को तेल में बने खाद्य पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए। 6. गाय और कुत्तों को भी तेल में बने पदार्थ खिलाने चाहिए। 7. बुजुर्गों व जरुरतमंद की सेवा और सहायता भी करनी चाहिए।
